शुक्रवार, 9 अगस्त 2013

3. कम्प्यूटरों की क्षमताएं तथा उनकी सीमाएं (Computer system Characteristics Capabilities and limitations)


         आजकल कम्प्यूटर का उपयोग लगभग हर क्षेत्र में हो रहा है । इस कारण इसकी निम्नलिखित क्षमताएँ हैः-

(क) गति (Speed) - कम्प्यूटर किसी भी कार्य को बहुत तेजी से कर सकता है । कम्प्यूटर कुछ ही क्षण में गुणा-भाग या जोड़-घटाव की करोड़ों क्रियाओं को कर सकता है । यदि आपको 440 X 56 का गुणा करना हो, तो इसमे आपकों लगभग 1 से लेकर 2 मिनट तक समय लग सकता है । यही कार्य पॉकेट केल्कुलेटर से करे तो वह लगभग 5 सैकेंड में किया जा सकता है । लेकिन एक आधुनिक कम्प्यूटर में यदि प्रोग्राम दिया गया हो तो ऐसे 30 लाख ऑपरेशन कुछ ही सैकण्डों में सम्पन्न हो सकते है ।

(ख) स्वचालन (Automation) - कम्प्यूटर अपना कार्य, प्रोग्राम के एक बार लोड हो जाने पर स्वतः करता रहता है । उदारहण के लिए किसी डेटा एन्ट्री प्रोग्राम पर कार्य कर रहे ऑपरेटर को स्वयं रिपोर्ट तैयार करने की आवश्यकता नही है, बल्कि कम्प्यूटर डेटा प्रविष्ट के आधार पर स्वयं ही रिपोर्ट देता रहता है ।

(ग) शुद्धता (Accuracy) - कम्प्यूटर अपना कार्य बिना किसी गलती के करता है । कम्प्यूटर के द्वारा गलती किये जाने के कई उदाहरण सामने आते है, लेकिन इन सभी गलतियों में कम्प्यूटर में गलत डेटा प्रविष्ट करते समय की गई होती है, या प्रोग्राम के विकास के समय । कम्प्यूटर स्वयं कभी गलती नही करता है ।

(घ) सार्वभौमिकता (Versatility) - कम्प्यूटर अपनी सार्वभौमिकता के गुण के कारण बड़ी तेजी से सारी दुनिया में छाता जा रहा है । कम्प्यूटर गणितीय कार्यों को सम्पन्न करने के साथ-साथ व्यवसायिक कार्यों के लिए भी प्रयोग किया जा सकता है । कम्प्यूटर में प्रिन्टर जोड़कर छपाई का काम किया जा सकता है । कम्प्यूटर को टेलीफोन लाईन से जोड़कर सारी दुनिया से सुचनाओं को आदान-प्रदान किया जा सकता है । कम्प्यूटर की सहायता से तरह-तरह के खेल(Games) खेले जा सकते है ।  

(ड) उच्च संग्रहण क्षमता (High Storage Capacity) - एक कम्प्यूटर सिस्टम की डेटा संग्रहण क्षमता अत्यधिक होती है । कम्प्यूटर लाखो-करोड़ो शब्दो को बहुत कम जगह में store करके रख सकता है । यह सभी प्रकार के डेटा, चित्र, प्रोग्राम, खेल तथा आवाज को कई वर्षों तक store करके रख सकता है ।  हम कभी भी यह सूचना कुछ ही सेकण्ड में प्राप्त कर सकते है तथा उपयोग में ला सकते है । 

(च) कर्मठता (Diligence) -  मानव किसी कार्य को निरन्तर करते रहने से कुछ ही घण्टों तक करने में थक जाता है । इसके ठीक विपरीत कम्प्यूटर किसी कार्य को निरन्तर कई घण्टों, दिनों तथा महीनों तक करने की क्षमता रखता है । इसके बावजूद उसके कार्य करने की क्षमता में कोई कमी नही आती है । कम्प्यूटर किसी भी दिये गये कार्य को बिना किसी भेदभाव के करता है, चाहे वह कार्य रुचिकर हो या उबाऊपन हो ।

कम्प्यूटर की सीमाएं

(क) बुद्धिमता की कमी (Lack of Intelligence) - कम्प्यूटर एक मशीन है । प्रयोक्ता के निर्देशों द्वारा कम्प्यूटर कार्य करता है । कम्प्यूटर किसी भी स्थिति में न  तो निर्देशों से अधिक और नही आदेशों से कम कार्य करता है ।

(ख) सामान्य बोध की कमी (Lack of Common Scene) - कम्प्यूटर एक बिल्कुल नौकर की भांति कार्य करता है । जैसे इसे आप यदि कहे कि जाओं और बाजार से सब्जी खरीद लो । ऐसा निर्देश देने पर वह बाजार जायेगा और सब्जी भी खरीदेगा परन्तु सब्जी लेकर घर तक वापस कभी नही आये । यहाँ प्रश्न उठता है क्यों । इसका सीधा सा उत्तर है कि आपने उसे सब्जी खरीदने को अवश्य कहा परन्तु उसे घर में लाने को नही कहा । इसका अर्थ यह है कि कम्प्यूटर के अन्द सामान्य बोध नही होता है ।

 

 

2. कम्प्यूटरों के मूलभूत प्रयोग (Fundamental uses of Computer)

कम्प्यूटरों के मूलभूत प्रयोगों पर निम्नलिखित वर्णन हैः-
1. घर में और व्यक्तिगत कार्यों में(Computer in Household and Personal Use)-
(क) रसोई घर में (In kitchen) - इलेक्ट्रानिक प्रोसेसर और मेमोरी का रसोई सम्बन्धी यन्त्रों, जैसे माइक्रो ओवन, रेफरिजरेटर, इंडक्टसक्शन कुकर आदि में प्रयोग हता है ।
(ख) कम्प्यूटरीकृत कार(Computerized Car) - आधुनिक कारों में कम्प्यूटर के द्वारा सभी नियंत्रण संचालित होते है जैसे- कार मालिक की आवाज पहचानकार दरवाजा खुल जाना, पैट्रोल की उचित मात्रा चेतावनी देना, गति पर नियत्रित करना, सड़क व शहर का मानचित्र उपलब्ध कराना (GPS System) आदि ।
(ग) कम्प्यूटरीकृत घर (Computerized Home)- आजकल घरों को कम्प्यूटर के द्वारा नियन्त्रित किया जा सकता है । कम्प्यूटरीकृत घरों में मेहमानों का स्वागत व उनकी पहचान करना, बगीचे में पानी देने का काम करना, मानव के काम-काज की गतिविधियों को देखने के लिए क्लोज सर्किट कैमरे का उपयोग करना, घर की सुरक्षा करना आदि कम्प्यूटर के द्वारा नियन्त्रित किया जा सकता है । घरों में दुर्घटना या चोरी होने पर अलार्म बजना शुरु हो जाता है ।
(घ) व्यक्तिगत रोबोट नौकर (Personal Robot Servants)- इसे व्यक्तिगत कार्यों के लिए नौकर भी बनाया जा सकता है । रोबोट कम्प्यूटर द्वारा संचालित एक ‘यान्त्रिक मानव’ (Robot) होता है । घरों में रोबोट का काम सफाई करना, वस्तु को एक स्थान से दूसरे स्थान पहुचाना, मंनोरंजन करना आदि ।

2. शिक्षा में कम्प्यूटर (Computer in Education)-
(क) कम्प्यूटर सीखना (Learning about Computer)-  आजकल कम्प्यूटर के कई विषयों जैसे- कम्प्यूटर विज्ञान, कम्प्यूटर इंफारमेंशन सिस्टम, कम्प्यूटर इंजीनियरिंग, कम्प्यूटर भाषाएं (Language), इन्टरनेट एण्ड ई-कॉमर्स, Application Software, आदि का अध्ययन किया जाता है । यह एक बहुत महत्त्वपूर्ण कम्प्यूटर अनुप्रयोग है ।

 (ख) कम्प्यूटर एक शिक्षक के रुप में- कम्प्यूटर का एक सॉफ्टवेयर CAI (Computer Assisted Instructions) है जो कम्प्यूटर को एक शिक्षक का रुप देता है । कम्प्यूटर में Education DVD  के उपयोग से हम किसी भी विषय के बिन्दुओ का फिल्म के रुप में  अध्ययन कर सकते है ।
(ग) समस्या- समाधान (Problem Solving)- अध्ययन में कठिन समस्याओं को कम्प्यूटर सरल कर देता है । कम्प्यूटर एक समस्या के हल के लिए अनेक व्यक्तियों के तर्को का उपयोग तेजी से कर लेता है जिससे समस्या शीघ्र हल हो जी है ।

3. मनोरंजन में कम्प्यूटर (Computer in Entertainment)
कम्प्यूटर का आविष्कार आज मनोरंजन की दुनिया के लिए वरदान है ।
(क) खेल (Games) - कमप्यूटर में हम मनोरंजन और बोद्धिक क्षमता बढ़ाने वाले खेलों का आनंद ले सकते है ।
(ख) चलचित्र (Movies)- फिल्म उद्योग में कम्प्यूटर से चलचित्रो (सिनेमा) में अनेक photographic Effect, Music Effect, Action Effect आदि को उत्पन्न किया है । कंम्प्यूटर में मल्टीमीडिया तकनीकी की सुविधा से काल्पनिक दृश्य भी जीवंत (Real) लगने लगता है । जैसे– Jurassic Park, Godzilla, Star War, Terminator, Robot आदि । आजकल कम्प्यूटर के माध्यम से काटूर्न्स फिल्मी का निर्माण होने लगा ।
(ग) संगीत (Music)- संगीतकार (Musicians) एक कम्प्यूटर, जिसे Electronic Synthesizer कहते है । यह आवाज को Record  करता है तथा पुरानी धुनों को मेमोरी में लोड करता है । कम्प्यूटर की सहायता से विभिन्न वाद्ययंत्रों की धुनें कृत्रिम रुप से तैयार की जा सकती है ।
(घ) कला (Arts)- कम्प्यूटर के द्वारा हम आकृतियों को विभिन्न रुप, आकार तथा रंग आदि दे सकते है । Drawing जैसे कार्य करने वाले अनेक सॉफ्टवेयर प्रोग्राम कम्प्यूटर में उपलब्ध होते है ।

4. सूचना प्रौद्योगिकी (Information Technology)
(क) इन्टरनेट (internet)- इन्टरनेट कम्प्यूटर का अंतराष्ट्रीय नेटर्वक है । दुनिया भर के कम्प्यूटर नेटर्वक इंटरनेट से जुड़े होते है और  हम कही से भी घर बैठे अपने कम्प्यूटर से वांछित जानकारी प्राप्त कर सकते है । राजनीतिक, खेल, सिनेमा, संगीत, स्वास्थ्य, चिकित्सा, ज्ञान-विज्ञान, संस्कृति आदि लगभग सभी विषय पर विविध सामग्री इंटरनेट पर उपलब्ध है ।
(ख) ई- व्यापार (E– Business)-  कम्प्यूटर में क्रिया इलेक्ट्रानिक विधि से होती है, अतः आधुनिक व्यवसाय जो कम्प्यूटर और इन्टरनेट के सहयोग से किया जाता है ‘ई-बिजनेस’ या ‘ईलेक्ट्रानिक बिजनेस’ कहलाता है ।  यह व्यवसाय एक विषय ई-कॉमर्स के अन्तर्गत आता है ।

5. चिकित्सीय जाँच में कम्प्यूटर (Computer in Medical Treatment)-
कम्प्यूटर हमें स्वस्थ और निरोग बनाने के लिए अथक प्रयासरत है । कम्प्यूटर के चिकित्सा के क्षेत्र में क्या योगदान है इस खण्ड में चर्चा की गई है ।
(क) कम्प्यूटर असिस्टेड डाइग्नोसिस (Computer Assisted Diagnosis)-  यह एक ऐसी सुविधा है जिसमें हार्डवेयर अथवा सॉफ्टवेयर, चिकित्सकों को रोगियों के परीक्षण में सहायता करते है । रोगी के लक्षणों को कम्प्यूटर में input किया जाता है तथा सॉफ्टवेयर इस रोगी के लक्षणों की तुलना अब तक के पिछले रोगियों के कम्प्यूटर में संग्रहीत लक्षणों व रोगों से करते है और रोग का पता  लगाते है ।
(ख) कम्प्यूटेड टोमोग्राफी (Computer Tomography)- यह एक ऐसी सुविधा है जिसमें CAT Scanning की जीती है । इसमें X– Ray किरण, हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर मिलकर रोगी के आन्तरिक अंगों का Three Dimensional चित्र प्रस्तुत करते है । चिकित्सक इस चित्र से रोगी के रोग को अधिक शुद्धता से जाँच सकते है ।
(ग) कम्प्यूटराईज्ड लाइफ सर्पोट सिस्टम (Computerized Life-Support System)-  इस सिस्टम में गम्भीर  अवस्था के रोगी को लगातार इलाज और जांच किया जाता है और रोगी की हदयगति, तापमान और रक्तचाप में प्राणघातक बदलाव को अलार्म से सूचित किया जाता है । यह सिस्टम कम्प्यूटर द्वारा ही संचालित होती है ।
 
 
 
 
 
 

1. कम्प्यूटर का विकास और इतिहास (Brief history of development of computers)

कम्प्यूटर का विकासः- कम्प्यूटर का इतिहास लगभग 300 वर्ष पूराना है जबकि चीन में एक गणना यंत्र (Calculation device) अबेकस का अविष्कार हुआ । यह एक यान्त्रिक डिवाईस (mechanical device) है, जो आज भी चीन, जापान, सहित एशिया के अनेक देशों में अंको की गणना के लिए उपयोग किया जा रहा है । अबेकस (abacus) तारों का एक फ्रेम होता है । इन तारों में गोटी (bead) पिरोए रहते है । प्रारम्भ में अबेकस को व्यापारी गणनाएं करने के लिए प्रयोग किये जाते थे । वर्तमान यह अबेकस बच्चों को गिनती सिखाने या जोड़, धटाव आदि गणनाएं करने के लिए उपयोग किये जाते है ।
शताब्दियों के बाद अनेक अन्य यांत्रिक मशीने अंकों की गणना के लिए विकसित की गई ।17 वी शताब्दी में फ्रांस के गणितज्ञ ब्लेज पास्कल (Baize Pascal)ने एक यांत्रिक अंकीय गणना यंत्र (Mechanical Digital Calculator) सन् 1645 में विकसित किया गया । इस मशीन को एंडिंग मशीन (Adding Machine) कहते थे, क्योकि यह केवल जोड़ या घटाव कर सकती थी । यह मशीन घड़ी और ओडोमीटर के सिद्धान्त पर कार्य करती थी ।
सन् 1694 में जर्मन गणितज्ञ व दार्शनिक गॉटफ्रेड विलहेम वॉन लेबनीज (1646-1716) ने पास्कलाईन का विकसित तैयार किया जिसे ‘रेकनिंग मशीन (Reckoning Machine)’ या ‘लेबनीज चक्र (Leibnitz Wheel)’ कहते है । यह मशीन अंकों के जोड़ व बाकी के अलावा गुणा व भाग की क्रिया भी करती थी ।
सन् 1801 में फ्रासीसी बुनकर जोसेफ जेकार्ड (Joseph Jacquard) ने कपड़े बुनने का ऐसा करघा (Loom) का अविष्कार किया जो कपड़ो में डिजाईन या पैटर्न स्वतः देता था ।
कप्यूटर के इतिहास में 19 वी शताब्दी को प्रारम्भिक समय का स्वर्णिम युग माना जाता है । चार्ल्स बैबेज ने सन् 1822 में एक मशीन का निर्माण किया जिसका व्यय ब्रिटिश सरकार ने वहन किया । उस मशीन का नाम डिफरेंस इंजिन (Difference Engine) रखा गया, इस मशीन में गियर और साफ्ट लगे थे । यह भाप से चलती थी ।
बैवेज का कम्प्यूटर के विकास में बहुत बड़ा योगदान रहा । बैवेज का एनालिटिकल इंजिन आधुनिक कम्प्यूटर का आधार बना और यही कारण है कि चार्ल्स बैवेज को कमप्यूटर विज्ञान का जनक कहा जाता हा ।
सन् 1890 में कम्प्यूटर के इतिहास में अमेरिका की जनगणना का कार्य एक महत्तवपूर्ण घटना थी । सन 1890 से पूर्व जनगणना का कार्य 7 वर्ष लगे थे । कम समय में  जनगणना के कार्य को सम्पन्न करने के लिए हर्मन होलेरिथ ने सन् 1869-1926 के बीच में एक मशीन बनाई जिसमें पंचकार्डों (Punch card) को विद्युत द्वारा संचालित किया गया । उस मशीन की सहायता से जनगणना का कार्य केवल तीन वर्ष में सम्पन्न हो गया । सन् 1924 में उस कम्पनी का नाम ‘कमप्यूटर टेबुलेटिंग रिकॉर्डिग कम्पनी’ के जगह international Business Machine हो गया, जो आज कम्प्यूटर निर्माण में विश्व की अग्रणी कम्पनियों मे से एक है ।
सन् 1940 में विद्युत यांत्रिक कम्प्यूटिंग (Electrometrical Computing) शिखर पर पहुँच चुकी थी । IBM के चार शीर्ष इंजीनियरों व डॉ. हॉवर्ड आइकेन ने सन् 1944 में एक मशीन विकसित किया और इसका official Name– Automatic Sequence Controlled Calculator रखा । बाद में इस मशीन का नाम ’B’ रखा गया । यह विश्व का सबसे पहला विद्युत-यान्त्रिक कम्प्यूटर (Electrometrical Computer) था
सन् 1945 में एटानासोफ तथा क्लीफोर्ड बेरी ने एक इलेक्ट्रानिक मशीन को विकसित किया जिसका नाम ABC रखा गया । ABC का पूरा नाम एटानासोफ बेरी कम्प्यूटर का संक्षिप्त रुप है ।
सन् 1945-46 के दौरान जॉन विलियम्स मूचली तथा जे.पी. एकर्ट ने सबसे पहला सामान्य विशेषता वाला  कम्प्यूटर का विकास पेनसिलवैनिया विश्वविद्यालय में किया जिसका नाम Eniac—Electronic Numeric Integer And Computer रखा गया ।  





कम्प्यूटर क्या है ? कम्प्यूटर और मानव में अन्तर

कम्प्यूटरः- कम्प्यूटर एक ऐसी इलेक्ट्रानिक युक्ति (Device) है, जो प्राप्त सूचनाओं (information) को दिए गए निर्देशों(Command) के अनुसार विश्लेषिच (Analyze) करके  अत्यंत कम समय में सत्य एवं विश्वसनीय परिणाम प्रस्तुत करती है । कम्प्यूटर शब्द की उत्पत्ति कम्प्यूट (compute) शब्द से हुई है, जिसका अर्थ है गणना करना अथवा गिनती करना । इसीलिए समान्यतः  को एक संगणक युक्ति (computing device) के रुप में जाना जाता है ।

 कम्प्यूटर एवं मनुष्य में अन्तरः-  कम्प्यूटर- एव मनुष्य में अन्तर यह है कि कम्प्यूटर में स्वयं की तार्किक शक्ति एवं स्मृति होती है । मनुष्य की स्मृति तो समय के साथ-साथ धुमिल होती जाती है, परन्तु कम्प्यूटर की स्मृति वैसी ही बनी रहती है, जैसे कि पहले थी।
                          कम्प्यूटर में अपनी बुद्धि एवं विवेक नही होता है । इसीलिए कम्प्यूटर प्रयोगकर्ता (computer user) दिए गए निर्देशों को प्रोग्राम के नियन्त्रण (control) द्वारा समझकर उसका पालन करता है और प्रयोगकर्ता को सही परिणाम प्राप्त होते है ।